प्रस्तुत कविता में कवयित्री ने जीवन का सकारात्मक पक्ष सामने रखा है |
कवयित्री को विश्वास है की मानव का विकास आस्था, दृढ़ संकल्प एवं नैतिक
मूल्यों से ही संभव है | चिंता, पीड़ा, रुदन और जीवन का खोखलापन कभी भी
विकास के माध्यम नहीं हो सकते | मनुष्य सकारात्मक मूल्यों को अपनाकर ही
जीवन के पथ पर हर्ष और उल्लास के साथ विजयश्री का वरण कर सकता है |